बदरीनाथ धाम चंदा हेराफेरी मामला : प्रमोद नौटियाल को जमानत मिली

  • श्री बदरीनाथ मंदिर चंदा हेराफेरी प्रकरण:  बीकेटीसी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से मिली जमानत,
  • परिजनों ने बताया न्याय की जीत कहा। आरोपों से लेकर बदरीनाथ में बीकेटीसी नीलकंठ विश्राम गृह में बरामदगी में की गयी साजिश

नैनीताल : श्री बदरीनाथ धाम चंदा हेराफेरी प्रकरण में आरोपी  बीकेटीसी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए। अदालत के इस फैसले के बाद प्रमोद नौटियाल के परिवार में खुशी का माहौल है।

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने पर उनके पारिवारिक सदस्यों और माता हेमलता नौटियाल ने इसे न्याय की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और विश्वास है कि उनके पुत्र के साथ न्याय होगा। परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्याय व्यवस्था पर भरोसा था और अब अदालत के आदेश से उनकी उम्मीदों को बल मिला है।

हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रमोद नौटियाल मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। वह साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे तथा जांच और सुनवाई में पूरा सहयोग करेंगे। इसके अलावा अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर अभियोजन पक्ष उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकता है। इन शर्तों के साथ मिली जमानत के बाद अब प्रमोद नौटियाल की पुरसाड़ी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

परिजनों के अनुसार, आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को उनके जेल से बाहर आने की उम्मीद है।वहीं, इस मामले में सह-आरोपी पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गयी हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब राजेंद्र चौहान को भी जल्द जमानत मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि उनकी जमानत को लेकर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और कानूनी तथ्यों के आधार पर ही होगा।

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित चंदा हेराफेरी प्रकरण ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं पारिवारिक सदस्यों उनकी माता ने आरोप लगाया था कि प्रमोद नौटियाल के बीकेटीसी नीलकंठ विश्राम गृह के कक्ष से फर्जी बरामदगी दिखायी गयी जबकि प्रमोद नौटियाल अपना कक्ष खाली कर प्रबंधक को चाबी सौंप चुके थे तथा बीकेटीसी से सूचना अधिकार के तहत कई सवाल किये थे बीकेटीसी से मिले जवाबों पर उन्होंने प्रश्न चिन्ह लगाये। उनकी पत्नी मीतू नौटियाल ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी अध्यक्ष गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के सम्मुख अपना पक्ष रखा कई तथ्य उजागर कर न्याय की मांग की।

वही विपक्षी दलों ने बीकेटीसी तथा प्रदेश सरकार से सवाल किया कि प्रमोद नौटियाल के बीकेटीसी अध्यक्ष का वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद किस आधार पर बदरीनाथ में उन्हें प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गयी तथा चढ़ावा गिनती का कार्य दिया गया इस मुद्दे पर ही कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सवाल उठाये तथा बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बहस हेतु चुनौती दी एक माह तक प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चलता रहा।

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चढ़ावा हेराफेरी के मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को आरोपी बनाया गया था। अब उत्तराखंड हाईकोर्ट से उनकी जमानत मंजूर होने के बाद मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है और सभी की निगाहें आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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